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मासिकधर्म period in hindi कम या ज़्यादा होने पर घरेलु नुस्खे

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लगभग 12-12 ग्राम हीरा कसीस विलायती, एलुआ, घी में हल्की सी भुनी हुई हींग, शुद्ध हिंगुल, सुहागे की खील और नमक को एकसाथ पीसकर पानी के साथ लगभग आधा ग्राम के बराबर की गोलियां बना लें। इन गोलियों को सुबह और शाम गर्म पानी से खाना चाहिए। इन गोलियों को मासिकधर्म के आने से 3-4 दिन पहले खाना शुरू करके मासिकधर्म के दौरान भी सेवन करते रहना चाहिए। इसके अलावा रोगी स्त्री की कमर और पेड़ू पर गर्म पानी की बोतल या गर्म ईंट से सिंकाई करनी चाहिए। रोगी स्त्री को गर्म पानी से भरे टब में नाभि तक बैठाना भी लाभकारी रहता है। घी में भुने हुए चने या लोबिया का रस, गर्म पानी, बाजरा, गेंहू, बैंगन, मटर, छुहारा, चाय और किशमिश का सेवन करना भी रोगी स्त्री के लिए लाभकारी है।
• अगर किसी स्त्री को मासिकधर्म के समय स्राव ज्यादा आता हो या उन दिनों में दर्द बहुत ज्यादा होता हो तो उसे मासिकधर्म शुरू होने के चौथे दिन से लगभग 3 ग्राम मुलहठी का चूर्ण, 2 ग्राम माईं, 1 ग्राम शुद्ध रसौत और 1 ग्राम कत्था को रोजाना सुबह और शाम फांककर उसके ऊपर से चावलों का पानी पी लें। ऐसी समस्याओं के लिए लगभग 120 से 240 मिलीग्राम नागभस्म को सुबह और शाम मक्खन के साथ लेना बहुत अच्छा रहता है। अगर रोगी स्त्री को इन साधारण योगों से किसी तरह का लाभ नहीं होता तो किसी अच्छे चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
• अगर शरीर में खून की कमी के कारण, मानसिक आघात या कमजोरी के कारण मासिकधर्म बहुत कम आता हो तो रोगी स्त्री को पौष्टिक भोजन और शरीर को मजबूत करने वाली औषधियों का सेवन करने से लाभ होता है। इस रोग में आंवले का मुरब्बा, लौह-भस्म, अभ्रक भस्म, चांदी की भस्म और फलघृत बहुत लाभकारी होता है।
• अगर मासिकधर्म बिल्कुल न आता हो तो पहले नंबर के बनाए नुस्खे में 12 ग्राम केशर और 25 ग्राम इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण मिला लें। इन गोलियों को लगभग 40 दिन तक सेवन करने से मासिकधर्म आना शुरू हो जाता है।
• जानकारी- यह गोलियां कब्ज लाने वाली होती है इसलिए इनका सेवन करते समय कब्ज आदि होने पर किसी तरह से डरना नहीं चाहिए।
बूढ़ी स्त्रियों का मासिकधर्म बंद होना-
अक्सर स्त्रियों का 40 से 50 साल की उम्र में मासिकधर्म धीरे-धीरे अनियमित हो जाता है जैसे कभी तो उनका मासिकधर्म 2-3 महीने तक बिल्कुल नहीं आता और कभी महीने में 2 बार भी आ जाता है। अगर स्त्री के साथ ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है तो इससे उसको बहुत ज्यादा मानसिक आघात पहुंचता है क्योंकि वह समझती है कि अब उसका स्त्रीत्व समाप्त हो गया है। इस कारण से उसके अंदर चिड़चिड़ापन सा पैदा हो जाता है, वह बात-बात पर गुस्सा करने लगती है। स्त्री को यह समझना चाहिए कि यह एक स्वाभाविक स्थिति है। इससे उसके आकर्षण में किसी प्रकार की कमी नहीं हो सकती और न ही संभोग सुख में कमी हो सकती है।

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